मायावती का उत्तराधिकारी कौन होगा? बसपा सुप्रीमो ने बताया- भतीजी दीपिका तैयार नहीं हुईं तो…

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लखनऊ। बड़े भतीजे आकाश आनंद को बसपा से तीन बार हटाने और वापस बुलाने के साथ हाल ही में छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने के बाद परिवारवाद के सवालों से घिरीं बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों (आकाश और ईशान) को भविष्य में बसपा संगठन में किसी भी छोटे-बड़े पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं देने का एलान किया है।

मायावती ने साफ किया है कि अविवाहित होने के चलते उन्हें मजबूरी में भाई आनंद को साथ रखना पड़ा। इतना जरूर कहा है कि जरूरत पड़ने पर आनंद अपनी बेटी कुमारी दीपिका को जिम्मेदारी दे सकते हैं। मायावती का यह फैसला पार्टी में परिवार की भूमिका और उनके उत्तराधिकार को लेकर चल रहीं चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

मायावती ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए पार्टी संगठन में उतारा था। कालांतर में उनको अपरिपक्व बता जिम्मेदारी छीन ली थी, लेकिन बाद में वापस दे दी थी। फिर उत्तराधिकारी बनाने के निर्णय को पिछले वर्ष वापस लेते हुए आकाश को पार्टी से ही बाहर कर दिया गया लेकिन कुछ माह बाद ही पुनः उनकी वापसी हो गई थी। हाल ही में आकाश को फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

इस बीच बसपा प्रमुख ने ईशान को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी है। परिवारवाद को बढ़ावा देने को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच शनिवार को मायावती ने एक्स पर लिखा कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की शिष्या होने के नाते मैं भी परिवारवाद के खिलाफ हूं। यदि मैं लड़की नहीं होती, तो भाई-बहनों में से किसी को साथ नहीं रखती। मेरे अविवाहित होने के नाते मजबूरी में छोटे भाई आनंद कुमार को रखा, जो मेरी देखभाल के साथ पार्टी की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

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अब इनके बच्चों के शादीशुदा होने पर मुझे काफी कुछ झेलना पड़ रहा है, लेकिन मैं किसी के भी मोह में न पड़कर पार्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दूंगी। इसीलिए मेरा यही अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा है कि अब इनके किसी भी बेटे और उनके बच्चों को बसपा में छोटे-बड़े पद पर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। यदि आनंद को मेरी मदद के लिए किसी की जरूरत पड़ती भी है तो फिर वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की आगे मदद ले सकते हैं।

बाद में उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे जरूरतानुसार वह अपनी खुद की जिम्मेदारी भी सौंप सकते हैं।मायावती ने यह भी साफ किया है कि बेटी के तैयार न होने पर आनंद पार्टी की आम सहमति से बसपा के ही दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। सरकार बनने पर केवल उसी व्यक्ति को मौका मिलेगा ताकि बसपा परिवारवाद से मुक्त रहे।

ईशान ने अपने एक्स अकाउंट पर इसे रीपोस्ट किया जबकि आकाश ने ऐसा नहीं किया है। लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रही हैं दीपिकाआनंद की बेटी कुमारी दीपिका अभी लगभग 22 वर्ष की हैं और लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। वह, अपने भाई आकाश और ईशान से छोटी हैं। आकाश व ईशान ने भी लंदन से पढ़ाई की है। दीपिका अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर रही हैं।

कभी बसपा के राजनीतिक मंचों और कार्यक्रमों में वह मौजूद नहीं रही हैं। हालांकि, बसपा प्रमुख द्वारा उनको जिम्मेदारी देने का रास्ता खोलने के बाद दीपिका के मायावती की राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

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संगठन से टिकट वितरण तक जेन-जी को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी

मायावती ने कहा कि संगठन में जेन-जी की लगभग 50 प्रतिशत तक भागीदारी की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधान सभा चुनावों के लिए सर्वसमाज के कर्मठ व युवा प्रतिभाओं को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता दी जा रही है।

वापस नहीं होंगे पार्टी से निष्कासित नेताबसपा प्रमुख ने पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी की चर्चाओं पर भी विराम लगा दिया हैं। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण निष्कासित लोगों को बसपा में कतई वापस नहीं लिया जाएगा।

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