लखनऊ। वर्षा के मौसम में गन्ना की फसल पर रोगों के खतरे को देखते हुए गन्ना विकास विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। लाल सड़न (रेड राट), पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टाप राट व मुरझा (विल्ट) जैसे प्रमुख रोगों के लक्षणों और उनके नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मानसून के दौरान अपनी फसल की निरंतर निगरानी करें और रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाए।
एडवाइजरी में कहा गया है कि मानसून के दौरान गन्ना फसल में रोगों के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। गन्ने की प्रमुख किस्मों को. 0238 और को. 05011 में लाल सड़न (रेड राट) के लक्षण मिलने पर संक्रमित पौधों को जड़ सहित तत्काल उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए। लाल सड़न से प्रभावित खेतों का पानी अन्य खेतों में न जाने दिया जाए, खेतों में जल निकासी पर ध्यान दिया जाए।
बोरेक्स का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करना आवश्यक
पोक्का बोइंग रोग के लक्षण दिखने पर किसानों को 15 दिन के अंतराल पर दो बार फफूंदनाशी कापर आक्सीक्लोराइड अथवा कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गन्ना आयुक्त के अनुसार मुरझा रोग की रोकथाम के लिए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना और सल्फर, जिंक सल्फेट एवं बोरेक्स का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करना आवश्यक है।
किसानों को रोग प्रबंधन के लिए रासायनिक नियंत्रण उपायों के साथ जैव पेस्टीसाइड (जैव कीटनाशकों, जैविक विकल्पों) का उपयोग करने के लिए कहा गया है। अपील की गई है कि यदि गन्ना फसल में रोगों का संक्रमण अधिक दिखाई दे या रोग तेजी से फैलने की स्थिति उत्पन्न हो तो वे तत्काल स्थानीय गन्ना विभाग के अधिकारियों व कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर वैज्ञानिक परामर्श प्राप्त करें।
