ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी 240 कर्मचारियों को देगी 46 करोड़, दोबारा नौकरी पर भी रखना होगा, 22 साल पहले निकाला था

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ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने साल 2003 में 240 कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया था। इस मामले में करीब 22 साल बाद सफाई कर्मचारियों को इंसाफ मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं कर्मचारियों को 46 करोड़ रुपये भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।

2018 में कर्मचारियों के पक्ष में सुनाया पुैसला

बताया जा रहा है कि ग्रेनो अथॉरिटी साल 2003 में 240 कर्मचारियों को बिना नोटिस के नौकरी से हटा दिया था। पीड़ित कर्मचारी सीटू के नेतृत्व में अपने हक के लिए तभी से लड़ाई लड़ रहे हैं। इसे मामले को औद्योगिक न्यायाधिकरण पंचम,मेरठ में उठा गया, जिसने मई वर्ष 2018 में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।

आदेश का किया था उल्लंघन

वहीं इस फैसले में अथॉरिटी को आदेश दिया गया था, कि वह कर्मचारियों को कार्य पर पुनः बहाल करे और पिछले वेतन का भुगतान भी करे। अथॉरिटी ने इस आदेश का पालन नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने भी कर्मचारियों के पक्ष में आकर अथॉरिटी की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए आदेश को बहाल कर दिया।

डीएम को भी दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने डीएम को निर्देश दिए कि वे 90 दिनों के भीतर अथॉरिटी से पैसावसूल कर कर्मचारियों को भुगतान कराएं और उन्हें वापस काम पर बहाल करें। इसके बाद अथॉरिटी ने सर्वोच्च कोर्ट का रुख किया।

1998 में हुई विवाद की शुरुआत

बता दें कि इस विवाद की शुरुआत वर्ष 1998 से हुई थी। अथॉरिटी में माली और सफाईकर्मियों ने स्थायी किए जाने की मांग उठाई थी। ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन संबंध सीआईटीयू के महामंत्री रामकिशन सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा अक्टूबर 2024 को दिए गए फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गए प्राधिकरण के आवेदन पर सुनवाई करने से न्यायालय ने इंकार कर दिया है। हम कानूनी प्रक्रिया से जीत कर आए हैं।

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