नोएडा के सेक्टर-18 में स्थित डीएलफ इलाके में पार्किंग का विवाद आया है. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्राची मोंगा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर नोएडा के प्रसिद्ध डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया (DLF Mall of India) के बाहर पार्किंग और टोइंग रैकेट का पर्दाफाश किया है. प्राची जब मॉल पहुंचीं तो अंदर की पार्किंग पूरी तरह भरी हुई थी. नोएडा की स्थानीय निवासी नहीं होने के कारण उन्हें वहां के पार्किंग नियमों की सटीक जानकारी नहीं थी. सड़क के किनारे पहले से ही दर्जनों गाड़ियां खड़ी थीं. आसपास दूर-दूर तक कोई भी ‘नो-पार्किंग’ का साइनबोर्ड नहीं लगा हुआ था.
जब प्राची ने वहां मौजूद एक व्यक्ति से पूछा कि क्या वह अपनी गाड़ी यहां पार्क कर सकती हैं, तो उस शख्स ने बेहद लापरवाही से जवाब दिया कि जब पहले से इतनी सारी गाड़ियां खड़ी हैं, तो एक और खड़ी करने से क्या फर्क पड़ेगा. उसकी इस बात पर भरोसा करके प्राची अपनी कार वहीं पार्क करके मॉल के अंदर चली गईं. लेकिन जब वह अपना काम खत्म करके वापस लौटीं, तो उनकी कार समेत सड़क पर खड़ी अन्य सभी गाड़ियां गायब थीं. पहले तो उन्हें लगा कि उनकी कार चोरी हो गई है, जिससे वह बुरी तरह घबरा गईं और सदमे में आ गईं.
कार छुड़ाने के लिए मांगे गए 2000 रुपये
कुछ देर बाद वहां मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनकी गाड़ी चोरी नहीं हुई है, बल्कि एक संगठित गिरोह ने उसे टो करके पास के एक बेसमेंट में छिपाकर रख दिया है. जब प्राची अपनी कार वापस लेने के लिए उस बेसमेंट में पहुंचीं, तो उनसे गाड़ी छोड़ने के एवज में सीधे 2,000 रुपये की अवैध रंगदारी की मांग की गई. इस घिनौने खेल को देखकर प्राची का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बड़ा सवाल उठाया कि आखिर नोएडा अथॉरिटी और स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे इस तरह का जबरन वसूली का अवैध कारोबार कौन चला रहा है.
प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह वायरल वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिससे नोएडा की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन पर बहुत बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. बिना किसी चेतावनी या बोर्ड के लोगों को गाड़ी पार्क करने के लिए प्रोत्साहित करना और फिर सुनियोजित तरीके से गाड़ियां उठाकर पैसों की अवैध वसूली करना आम जनता को लूटने का नया जरिया बन गया है.
