पीएम मोदी 10 जून को सभी प्रधानमंत्रियों का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, बीजेपी बोली, ‘नरेंद्र मोदी ऐसा रिकॉर्ड बनाएंगे जो कभी नहीं टूटेगा’

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नई दिल्ली। राजनीतिक-सार्वजनिक जीवन में कई प्रतिमान प्रस्तुत कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब एक और बड़ी उपलब्धि से कुछ कदम दूरी पर खड़े हैं। इसी 10 जून को मोदी लगातार सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

उन्होंने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और इस तरह उनका अब तक का कुल कार्यकाल 4399 दिनों का हो जाएगा, जबकि अब तक सतत लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने इस दायित्व को लगातार 4398 दिनों तक संभाला।

17 अप्रैल, 1952 को हुआ था पहली लोकसभा का गठन

चुनावों के बाद पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल, 1952 को हुआ था और नवगठित लोकसभा की पहली बैठक 13 मई, 1952 को हुई थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 मई, 1952 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और 27 मई, 1964 तक सेवा की। 13 मई, 1952 से 27 मई, 1964 तक की यह अवधि 4,398 दिनों की होती है।

26 मई, 2014 प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी

वहीं, नरेन्द्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री चुने गए। 26 मई, 2014 से 10 जून, 2026 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने के उनके कुल दिन 4,399 हो जाएंगे। इंदिरा गांधी का लगातार प्रधानमंत्री कार्यकाल 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक था। यह 4077 दिन होता है, जिसे पीएम मोदी ने 25 जुलाई, 2025 को ही पार कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि पंडित नेहरू और पीएम मोदी ने अलग-अलग परिस्थितियों में नेतृत्व संभाला है। नेहरू प्रधानमंत्री बने, तब भारत की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी।

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अलग-अलग परिस्थियों में किया देश का नेतृत्व

वहीं, पीएम मोदी ने 2014 में पदभार संभाला, तब तक भारत की जनसंख्या 131 करोड़ से अधिक हो चुकी थी, जो पैमाने और शासन की जटिलता के मामले में लगभग चार गुणा अधिक थी। अब यह जनसंख्या 146 करोड़ से अधिक है। इसके अलावा भारत के पहले 1951-52 के आम चुनाव में केवल 53 राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा था, जबकि 2014 तक यह आंकड़ा बढ़कर 464 हो गया।

चुनावी विखंडन का यह सिलसिला 2024 के चुनावों में 7445 राजनीतिक दलों की भागीदारी के साथ ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया, जो लगभग 14 गुणा की वृद्धि है। तब की तुलना में मजबूत क्षेत्रीय दलों की राजनीति में भागीदारी और चुनौतियां बढ़ी हैं।

मतदाताओं के लिहाज से देखें तो पहले आम चुनाव में लगभग 17 करोड़ मतदाता थे और 2014 तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 83 करोड़ से अधिक हो गई। इसी गति से अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां बढ़ती गई हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी लगातार दो पूर्ण बहुमत के कार्यकाल पूरे करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। वे नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बने।

सामाजिक न्याय के पैमाने पर दोनों प्रधानमंत्रियों की तुलना

इन दो लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना सामाजिक न्याय के पैमाने पर भी की जा रही है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, पंडित नेहरू के तीसरे कार्यकाल (1957-1962) के दौरान मंत्रिपरिषद में पिछड़े समूहों का प्रतिनिधित्व अत्यंत सीमित रहा। इनमें अनुसूचित जाति से कुल तीन या चार सदस्य थे, जबकि अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रतिनिधित्व शून्य था।

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वहीं, मोदी के मंत्रिपरिषद के लगभग 60 प्रतिशत सदस्य पिछड़े और आदिवासी समुदायों से आते हैं। इनमें ओबीसी से 27, अनुसूचित जाति से 10 और अनुसूचित जनजाति से पांच सदस्य हैं। महिला भागीदारी की तुलना करें तो 1952 में महिला कैबिनेट सदस्य मात्र 4.4 प्रतिशत (22 सांसद) से 2024 में यह बढ़कर 13.63 प्रतिशत (74 सांसद) तक पहुंच गई है।

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