Aaj Ka Panchang आज का पंचांग 28 अप्रैल 2026 : वैशाख शुक्ल द्वादशी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त

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पंचांग के अनुसार, आज भौम प्रदोष व्रत और परशुराम द्वादशी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान शिव और परशुराम जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि इन कामों को करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। भौम प्रदोष व्रत और परशुराम द्वादशी के अवसर पर कई योग का निर्माण भी हो रहा है।
आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल (Aaj ka Panchang 28 April 2026) का समय समेत आदि जानकारी।

तिथि: शुक्ल द्वादशी
मास: वैशाख
दिन: मंगलवार
संवत्: 2083

तिथि: शुक्ल द्वादशी – सायं 06 बजकर 51 मिनट तक, फिर त्रयोदशी
योग: व्याघात – रात्रि 09 बजकर 04 मिनट तक, फिर हर्षण
करण: बव – प्रातः 06 बजकर 30 मिनट तक
करण: बालव – सायं 06 बजकर 51 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 43 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 54 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: दोपहर 04 बजकर 04 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: रात्रि 04:00 बजे (29 अप्रैल)

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: मेष राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: कन्या राशि में स्थित हैं

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 03 बजकर 01 मिनट से सायं 04 बजकर 42 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से सायं 05 बजकर 16 मिनट तक
गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 01 मिनट से प्रातः 10 बजकर 40 मिनट तक

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आज का नक्षत्र

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र: रात्रि 10 बजकर 36 मिनट तक, फिर हस्त
स्थान: 26°40’ सिंह राशि से 10°00’ कन्या राशि तक
नक्षत्र स्वामी: सूर्यदेव
राशि स्वामी: सूर्यदेव और बुधदेव
देवता: अर्यमा (मित्रता और एकजुटता के देवता)
प्रतीक: बिस्तर
सामान्य विशेषताएं: विनम्र, मेहनती, बेहतरीन वक्ता, बुद्धिमान, भरोसेमंद दोस्त, मददगार, उदार, ईमानदार, कभी-कभी क्रोधी, समृद्ध और काम के प्रति समर्पित।

भौम प्रदोष व्रत 2026

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 अप्रैल, शाम 06 बजकर 51 मिनट
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 अप्रैल, शाम 07 बजकर 51 मिनट
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 06 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 04 बजे मिनट

मंगलवार को पड़ने वाली त्रयोदशी को ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और मंगलदेव की कृपा पाने का विशेष अवसर है। मान्यता है कि इस दिन पूजन करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है और भूमि-संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भौम प्रदोष का उपवास जातक को साहस, आंतरिक शक्ति और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। यह व्रत मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने और आर्थिक बाधाओं को दूर करने में भी सहायक है। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव आराधना करने से जातक को निर्भयता और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है।

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