संचार नाउ। गौतम बुद्ध नगर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के बाद नई मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस प्रक्रिया में जिले से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि राजनीतिक और लोकतांत्रिक दृष्टि से भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने से यह बहस तेज हो गई है कि मतदाता सूची का यह शुद्धिकरण प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा या फिर चुनावी प्रणाली में भरोसे को कमजोर करने वाला साबित होगा। अब सभी की निगाहें अंतिम सूची और प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हैं।
दरअसल, एसआईआर के बाद जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों—नोएडा, दादरी और जेवर—से कुल 4,47,471 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लगभग 23.98 प्रतिशत है। इनमें नोएडा विधानसभा से 2,09,050 (27.11 प्रतिशत), दादरी से 1,64,157 (22.59 प्रतिशत) और जेवर विधानसभा से 74,264 (20.19 प्रतिशत) मतदाता शामिल हैं। इसके बाद इन तीनों विधानसभाओं में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 14.18 लाख रह गई है।
वही, गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इसमें शामिल सिकंदराबाद और खुर्जा विधानसभा से भी बड़ी संख्या में नाम कटे हैं। सिकंदराबाद विधानसभा से 65,034 और खुर्जा विधानसभा से 69,969 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस प्रकार पूरे गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र से कुल 5,82,003 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं।
2024 की लोकसभा जीत बनाम कटे वोट: बड़ा विरोधाभास
इन आंकड़ों की तुलना यदि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से की जाए तो स्थिति और गंभीर प्रतीत होती है। 2024 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा को 8,57,829 मत प्राप्त हुए थे, जबकि सपा–कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. महेंद्र नागर को 2,98,357 और बसपा के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 2,51,615 मत मिले थे। डॉ. महेश शर्मा की जीत का अंतर 5,59,472 मतों का रहा, जो अब कटे हुए कुल मतदाताओं की संख्या से कम है। इससे यह प्रश्न उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में जिन मतदाताओं के नाम अब हटाए गए हैं, उनकी भूमिका पूर्व के चुनावों में क्या रही और सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।
एसआईआर के बाद अब अंतिम सूची पर सबकी नज़र
प्रशासन के अनुसार एसआईआर अभियान 4 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच चलाया गया। इस दौरान 1,76,228 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। कई मतदाताओं ने गणना पत्र तो जमा किए, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित विवरण प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रशासन ने नाम जोड़ने और काटने को लेकर 21 जनवरी तक आपत्तियां आमंत्रित की हैं, जबकि 6 जनवरी से 27 फरवरी के बीच 35 स्थानों पर लापता मतदाताओं की सुनवाई की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 मार्च को किया जाएगा।
