गाजियाबाद आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने बिंदल ग्रुप के दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर स्थित पेपर व शुगर मिल पर छापा मारकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी पकड़ी है। टीम ने जांच के दौरान तीन करोड़ से ज्यादा का बिना हिसाब का कैश और 20 करोड़ से ज्यादा कीमत के जेवर बरामद किए हैं। इसके साथ ही छापे के दौरान 50 से ज्यादा अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं।
आयकर अधिकारियों ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 132 के तहत मेसर्स बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों को टारगेट करते हुए बड़े पैमाने पर सर्च व सीजर ऑपरेशन पूरा किया है। 18 मार्च को शुरू हुए ये छापे दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में एक साथ कई जगहों पर मारे गए।
इस ऑपरेशन में मुजफ्फरनगर की छह और बड़ी पेपर मिलें शामिल थीं। इनमें बिंदल्स डुप्लेक्स लिमिटेड, अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स लिमिटेड, टिहरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड, शाकुंभरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड और बिंदल इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल हैं। इसके अलावा बिजनौर के गांव चांगीपुर में ग्रुप की शुगर यूनिट की भी कड़ी जांच की गई।
आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि जांच में मिले सुबूतों से पता चलता है कि खोई (गन्ने की बची हुई छाल) और दूसरे कच्चे माल की बिना हिसाब-किताब खरीद की गई। इसके अलावा कागज के क्षेत्र में 50 करोड़ से ज्यादा की फर्जी खरीद का पता चला।
आईटीआर में 171.3 करोड़ की छूट का दावा मिला गलत
आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, बिंदल ग्रुप की ओर से आयकर रिटर्न आयकर अधिनियम की धारा 80आईए के तहत कुल 171.3 करोड़ रुपये की छूट लेने का दावा किया। दस्तावेजों की जांच में दावा गलत पाया गया।
हिसाब-किताब रखने में नाकाम
आयकर अधिकारियों का कहना है कि बिंदल पेपर्स मिल लिमिटेड (बीपीएमएल) के आंतरिक अकाउंटेंट और पावर प्लांट के जनरल मैनेजर के धारा 132(4) के तहत दर्ज बयानों से पता चला है कि समूह अपने कागज, बिजली और चीनी इकाइयों के लिए अलग-अलग हिसाब-किताब की किताबें रखने में नाकाम रहा। जांचकर्ताओं को केवल समेकित किताबें और ट्रायल बैलेंस मिले। चार दिनों तक चला छापा शनिवार को समाप्त हो गया। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय अनियमितताओं की सीमा का और पता लगाने के लिए बिंदल समूह के प्रमुख कर्मचारियों और निदेशकों के बयान दर्ज करने का काम जारी है।
