संचार नाउ। प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में डीड राइटर और अधिवक्ताओं की हड़ताल लगातार नौवें दिन भी जारी रही। शुक्रवार को सेक्टर गामा-1 स्थित रजिस्ट्री कार्यालय से परी चौक तक प्रस्तावित पैदल मार्च को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दरअसल, अधिवक्ताओं का आरोप है कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने से हजारों डीड राइटर, अधिवक्ता और उनसे जुड़े कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से धरना-प्रदर्शन जारी है, लेकिन अब तक कोई सक्षम अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनने नहीं पहुंचा है।
रजिस्ट्री बार अध्यक्ष कुलदीप भाटी ने कहा कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में उनका आंदोलन लगातार जारी है और जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है, बल्कि भविष्य में आम लोगों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। इसी उद्देश्य से अधिवक्ता और डीड राइटर आंदोलन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गामा-1 रजिस्ट्री कार्यालय में प्रतिदिन करीब 3 हजार रजिस्ट्रियां होती हैं, जबकि पूरे जिले में यह संख्या 7 से 8 हजार तक पहुंचती है। हड़ताल के चलते हजारों रजिस्ट्रियां प्रभावित हुई हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
वहीं, सब रजिस्ट्रार सत्य प्रकाश ने बताया कि सरकार ने 4 जून को आदेश जारी कर पहली बार प्राधिकरण से आवंटित संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की है। इसके तहत प्राधिकरण से संबंधित सभी विवरण सीधे सब रजिस्ट्रार कार्यालय तक पहुंचेंगे और डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में पहले से ही अधिवक्ताओं की भूमिका सीमित थी, जबकि स्टांप शुल्क की गणना जैसे कार्यों में उनकी भूमिका आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि वार्ता के दौरान काम शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद अधिवक्ता फिर से हड़ताल पर बैठ गए। उनके अनुसार, प्रतिदिन 2 हजार से अधिक रजिस्ट्रियों और 5 से 6 करोड़ रुपये के राजस्व पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
