संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने वायु प्रदूषण की रोकथाम और निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले मलबे यानी Construction & Demolition (C&D) Waste के उचित निस्तारण को लेकर सेक्टर-2 और सेक्टर-3 में जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के दौरान RWA पदाधिकारियों और सेक्टरवासियों को C&D वेस्ट के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और पुनर्चक्रण के महत्व की जानकारी दी गई।
दरअसल, अभियान का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे को खुले में डाले जाने से रोकना और उसे निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से C&D Waste Processing Plant तक पहुंचाना रहा। प्राधिकरण की टीम ने स्थानीय निवासियों को बताया कि प्रोसेसिंग प्लांट में तैयार किए गए रीसाइकल्ड C&D मटेरियल का दोबारा निर्माण कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है।
खुले में मलबा डालने से रोकने पर जोर
जागरूकता अभियान के दौरान सेक्टरवासियों से अपील की गई कि निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले मलबे को सड़कों, खाली भूखंडों या खुले स्थानों पर न डालें। C&D वेस्ट के निर्धारित तरीके से निस्तारण की व्यवस्था का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को जागरूक किया गया।
रीसाइकल्ड सामग्री के इस्तेमाल की दी जानकारी
प्राधिकरण की टीम ने नागरिकों को C&D Waste Processing Plant में तैयार होने वाले पुनर्चक्रित निर्माण सामग्री के बारे में भी जानकारी दी। अभियान में निर्माण कार्यों में रीसाइकल्ड सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, ताकि C&D वेस्ट का दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और कचरे के कारण होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
प्राधिकरण और कार्यदायी संस्था की टीम रही मौजूद
अभियान में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से रामकुमार और श्यामा प्रसाद, वरिष्ठ प्रबंधक, अरविंद कुमार और दिव्या चौधरी, प्रबंधक के साथ स्वतंत्र वर्मा, रोहित गुप्ता एवं लव शंकर भारती मौजूद रहे। इसके अलावा कार्यदायी संस्था Feedback Foundation और APAG की टीम ने भी अभियान में भाग लिया।
टीमों ने सेक्टरवासियों को वायु प्रदूषण नियंत्रण, C&D वेस्ट के उचित निस्तारण और रीसाइकल्ड सामग्री के पुनः उपयोग को लेकर जागरूक किया। प्राधिकरण की ओर से नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा गया कि सामूहिक प्रयासों से शहर को स्वच्छ रखने के साथ प्रदूषण को नियंत्रित करने और बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
