देश में सीवर सफाई के दौरान आए दिन मजदूरों की मौत के मामले सामने आते रहते हैं। गरीब मजदूर सफाई करने मैनहोल के नीचे उतरते हैं और वहां जहरीली गैस की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। कई बार तो ऐसे मामलों में एक से ज्यादा लोगों की मौत भी हुई है। इन्हीं सब घटनाओं को देखते हुए और लोगों की जान से खिलवाड़ को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण शहर में सीवर सफाई व्यवस्था में एक बड़ा और तकनीकी बदलाव करते हुए ‘केरल मॉडल’ अपनाने जा रहा है। इसके तहत यहां जोखिम भरे मैनुअल तरीके से की जाने वाली सीवर सफाई की जगह अब यहां जल्द ही केरल की तरह रोबोटिक तकनीक अपनाई जाएगी।
प्राधिकरण के आधिकारिक सूचना विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए शनिवार को बताया कि इस तकनीक के बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए अधिकारियों का एक दल जल्द ही केरलम भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सफाई कर्मचारियों को सीवर या मैनहोल के अंदर उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी जान को होने वाला खतरा लगभग समाप्त हो जाएगा।
स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अधिकारियों का दल केरलम् जाएगा
अधिकारियों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण का जल खंड विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और योजना को जल्द ही जमीन पर उतारने की तैयारी में जुटा है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक को समझने और लागू करने से पहले अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी सिलसिले में 9 मई को प्राधिकरण के दो वरिष्ठ प्रबंधकों को केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम भेजा जाएगा, जहां वे रोबोटिक सीवर सफाई सिस्टम का अध्ययन करेंगे। उन्होंने बताया कि यह मॉडल केरल में पहले से सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है और देश में इसे एक उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
इस तरह काम करते हैं आधुनिक तकनीक से लैस रोबोट
तकनीक की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि रोबोटिक मशीनें अत्याधुनिक तकनीक से लैस होती हैं, जिनमें कैमरा, सेंसर और मैकेनिकल आर्म शामिल होते हैं। ये मशीनें मैनहोल के भीतर जाकर गाद, कचरा और जाम सामग्री को बाहर निकालती हैं। इस दौरान पूरी प्रक्रिया को ऑपरेटर बाहर बैठकर मॉनिटर पर देखते हुए कंट्रोल करता है, जिससे जहरीली गैस, ऑक्सीजन की कमी और अन्य खतरों से पूरी तरह बचाव संभव हो जाता है।
नई तकनीक से कई स्तरों पर होगा नोएडा को फायदा
अधिकारियों का कहना है कि बीते सालों में सीवर सफाई के दौरान कई हादसे और कर्मचारियों की मौतें सामने आने के बाद प्राधिकरण ने यह अहम फैसला लिया है। साथ ही इस तकनीक के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल से नोएडा को कई स्तरों पर फायदा होगा। एक ओर जहां सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर सीवर सफाई की गुणवत्ता और गति में भी सुधार आएगा। जाम लाइनें जल्दी साफ होंगी, शिकायतों में कमी आएगी और शहर की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल नोएडा में सफल रहता है, तो इसे उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। इस कदम को शहरी स्वच्छता और तकनीकी नवाचार की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
