संचार नाउ। आज जब देशभर में महात्मा गांधी की जयंती पर सत्य, अहिंसा और न्याय के उनके संदेश को याद किया जा रहा है, उसी दिन गौतमबुद्ध नगर में एक परिवार ने अपने कथित प्रशासनिक उत्पीड़न के विरोध में बेहद प्रतीकात्मक और भावुक तरीके से आवाज उठाई। जेवर तहसील क्षेत्र के गांव कानीगढ़ी निवासी सुंदर सिंह अपने बच्चों के साथ ‘अन्याय रूपी चिता’ के पास आमरण अनशन पर बैठ गए। उनका कहना है कि वर्षों से जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दरअसल, सुंदर सिंह का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और उनके परिवार के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने अधिकारियों पर मनमाने रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके दादा और पिता के जाति प्रमाण पत्र मौजूद हैं, इसके बावजूद उनके बच्चों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं।
“हमारी बात नहीं सुनी तो बच्चों के साथ यहीं बैठे रहेंगे”
अनशन पर बैठे सुंदर सिंह का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ न्याय की उम्मीद में यहां बैठे हैं। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं बल्कि अपनी समस्या को जिम्मेदार अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके सामने ‘अन्याय की चिता’ बनी है और वह प्रशासन से हाथ जोड़कर न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक वह अनशन से नहीं उठेंगे।
दादा-पिता के प्रमाण पत्र, फिर बच्चों के प्रमाण पत्र पर अड़चन क्यों?
सुंदर सिंह ने सबसे बड़ा सवाल अपने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि जब परिवार की पिछली पीढ़ियों के जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं तो फिर उनके बच्चों के प्रमाण पत्र जारी करने में आखिर क्या अड़चन है? यही सवाल अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, प्रमाण पत्र जारी नहीं होने के वास्तविक कारण और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या आपत्ति या दस्तावेजी कमी बताई गई है, इसका आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा का भी दावा
पीड़ित सुंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की गुहार अधिकारियों के सामने लगाई। उनका दावा है कि उन्होंने गौतमबुद्ध नगर से लखनऊ तक पैदल जाने का प्रयास भी किया, लेकिन उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। अब सुंदर सिंह का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री से ही न्याय की उम्मीद है। उनका मानना है कि यदि उनकी पूरी बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच जाए तो उनकी समस्या का समाधान हो सकता है।
गांधी जयंती पर उठता बड़ा सवाल—क्या फरियाद सुनने के लिए चिता तक पहुंचना पड़ेगा?
2 अक्टूबर को देश महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार गांधी जी का संदेश सत्य, अहिंसा और नैतिक साहस से जुड़ा रहा है और उनकी जयंती के अवसर पर अहिंसा के मूल्यों को भी याद किया जाता है। ऐसे दिन एक परिवार का ‘अन्याय की चिता’ के पास बैठकर न्याय की गुहार लगाना कई सवाल खड़े करता है। क्या किसी नागरिक की समस्या का समाधान कराने के लिए उसे इस हद तक जाना पड़े कि वह अपने बच्चों के साथ आमरण अनशन पर बैठ जाए?
जब दादा-पिता के प्रमाण पत्र हैं तो बच्चों के क्यों नहीं? प्रशासन से सुंदर सिंह का बड़ा सवाल
सुंदर सिंह ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है—आखिर ऐसा क्या कारण है कि उनके बच्चों के जाति प्रमाण पत्र अब तक नहीं बन पाए? बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार लगाने के बावजूद उनकी आवाज मुख्यमंत्री तक क्यों नहीं पहुंच पा रही है? अब निगाह प्रशासन की ओर है कि वह इस मामले में पीड़ित परिवार की शिकायत की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है और जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी अड़चन का कारण सार्वजनिक करता है।
