संचार नाउ। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की 93वीं बोर्ड बैठक आज 28 सितंबर 2026 को आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र की स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 7 प्रतिशत भूखंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने तथा भूमि खरीद से जुड़े लंबित मामलों के समाधान सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कचरा प्रबंधन के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार
YEIDA क्षेत्र में Integrated Solid Waste Management और Sanitation व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल की गई है। विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक एवं उचित प्रबंधन के लिए Detailed Project Report तैयार कराई गई हैं।
इसके साथ ही कचरा प्रबंधन और नियंत्रण को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से “YEIDA Waste Management (Regulation & Control) Bye-Laws, 2026” का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसे Draft Gazette Notification के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इन नियमों के जरिए क्षेत्र में स्वच्छता, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, पर्यावरण संरक्षण और व्यवस्थित वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
10,069 किसानों को जारी हो चुके हैं आरक्षण पत्र
भूमि अधिग्रहण से प्रभावित पात्र किसानों को 7 प्रतिशत भूखंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है। अब तक 10,069 किसानों के आरक्षण पत्र जारी किए जा चुके हैं और विभिन्न सेक्टरों में 4,978 भूखंडों का नियोजन किया जा चुका है। किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ देते हुए अब तक करीब 3,142 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रतिकर राशि वितरित की जा चुकी है। प्राधिकरण के अनुसार यह पहल किसानों के अधिकार, हित और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में की जा रही है।
पुरानी दर पर सहमति देने वाले किसानों के लिए भी फैसला
बोर्ड की 92वीं बैठक में गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर में आपसी सहमति से भूमि खरीद के लिए नई दरों को मंजूरी दी गई थी। इसके अनुसार ₹4,558 प्रति वर्गमीटर तथा एक्सप्रेसवे सहित ₹4,037 प्रति वर्गमीटर की दर से भूमि खरीद की जा रही है।
अब उन किसानों के मामलों में भी संशोधित नई दरों के अनुसार बैनामा कराया जाएगा, जिन्होंने पूर्व निर्धारित दरों पर भूमि देने की सहमति दी थी, लेकिन विभिन्न कारणों से 20 अगस्त 2026 तक बैनामा नहीं करा सके। प्राधिकरण के अनुसार यह निर्णय भूमि खरीद प्रक्रिया को गति देने, लंबित मामलों का समाधान करने तथा किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में लिया गया है।
