लीज बैक के मामलों में किसानों का ब्याज माफ करने की तैयारी, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने लिया बड़ा फैसला

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संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा में ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में वर्षों से चली आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब लीज बैक के लिए जमा की जाने वाली प्रतिकर राशि पर किसानों को ब्याज से राहत दिलाने की तैयारी है। बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में ब्याज माफी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इस प्रस्ताव को शासन के पास भेजा जाएगा। इसके साथ ही लीज बैक के मामलों में किसानों के हिस्से का निर्धारण कर उनके पक्ष में लीज डीड संपन्न कराने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गई है।

दरअसल, बोर्ड बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार ने की। बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, यमुना प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह, एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

देरी से भुगतान पर लगने वाले ब्याज से मिलेगी राहत

दरअसल, ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में निर्धारित धनराशि का भुगतान तय समय में नहीं करने पर किसानों को ब्याज देना पड़ता है। नियमों के अनुसार तीन महीने से अधिक की देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज लगाया जाता है। वहीं, एक वर्ष के भीतर भुगतान नहीं होने पर पट्टा निरस्त करने का प्रावधान भी है। ऐसे में कई किसान आर्थिक और कानूनी अड़चनों का सामना कर रहे थे।

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किसानों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी कि लीज बैक के लिए जमा की जाने वाली प्रतिकर राशि पर लगने वाले ब्याज को माफ किया जाए। इसी मांग को देखते हुए प्राधिकरण ने ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। बोर्ड की मंजूरी के बाद अब इसे शासन के पास भेजा जाएगा।

किसानों के हिस्से का निर्धारण कर होगी लीज डीड

बोर्ड बैठक में लीज बैक के मामलों में एक अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्था को भी मंजूरी मिली है। इसके तहत ग्रामीण आबादी के मामलों में किसानों के हिस्से का निर्धारण कर उनके पक्ष में लीज डीड संपन्न कराई जाएगी। इससे लीज बैक से जुड़े मामलों में कानूनी और प्रक्रियात्मक अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी।

यह प्रक्रिया शासनादेश 24 अप्रैल 2010, ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली-2011 और संशोधित 2015 के प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। प्राधिकरण के इस फैसले से लंबे समय से लीज बैक और ब्याज संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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