संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा में आबादी भूखंड आवंटन को लेकर किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब आबादी भूखंड की पात्रता निर्धारित करने में परिवार के दायरे को और व्यापक किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों की मांग को स्वीकार करते हुए सास-ससुर को भी निर्धारित पारिवारिक पात्रता में शामिल करने का निर्णय लिया है। बुधवार को प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से उन किसानों के परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो जमीन हस्तांतरण से जुड़े नियमों के कारण आबादी भूखंड के लाभ से वंचित रह जाते थे।
दरअसल, बोर्ड बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार ने की। बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, यमुना प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह, एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब परिवार की पात्रता में शामिल होंगे सास-ससुर
प्राधिकरण द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार, किसान परिवार की निर्धारित पात्रता में पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी के साथ अब सास-ससुर को भी शामिल किया जाएगा। इससे आबादी भूखंड आवंटन के मामलों में पात्रता का दायरा बढ़ेगा।
पुत्रवधू के नाम जमीन होने पर नहीं होगी परेशानी
दरअसल, किसानों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि भूमि अर्जन की कार्रवाई से पहले कई मामलों में किसान अपनी जमीन पुत्रवधू के नाम हस्तांतरित कर देते हैं। ऐसे मामलों में प्राधिकरण की प्रचलित नीति के तहत पुत्रवधू को आबादी भूखंड आवंटन का लाभ मिलने में परेशानी आती थी। किसानों का कहना था कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण जमीन हस्तांतरण होने पर परिवार को आबादी भूखंड के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसी समस्या को देखते हुए प्राधिकरण ने पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया, जिस पर बोर्ड ने अपनी स्वीकृति दे दी।
निर्धारित शर्तें पूरी करना होगा जरूरी
इस संशोधित व्यवस्था का लाभ लेने के लिए किसान का संबंधित अधिसूचित क्षेत्र का मूल निवासी होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही संबंधित भूमि का राजस्व अभिलेखों में निर्धारित नियमों के अनुरूप दर्ज होना भी जरूरी रहेगा। प्राधिकरण का उद्देश्य पात्र किसानों को आबादी भूखंड आवंटन का लाभ दिलाना और अनावश्यक तकनीकी अड़चनों को कम करना है।
