नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित की जा रही स्पोर्ट्स सिटी योजना एक बार फिर सुर्खियों में है. योजना के तहत चार कंसोर्टियम बिल्डरों को बड़ी मात्रा में जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन गंभीर अनियमितताओं के चलते अब प्राधिकरण सख्त रुख में नजर आ रहा है. आरोप है कि बिल्डरों ने जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर सब-लीज तो कर दी, लेकिन करीब 12 हजार करोड़ रुपये का बकाया प्राधिकरण में जमा नहीं कराया.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राहत
इस वित्तीय अनियमितता के चलते प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में अपनी 201वीं बोर्ड बैठक में परियोजना के मानचित्रों की स्वीकृति पर रोक लगा दी थी. हालांकि, उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद यह रोक हटा ली गई, लेकिन कई कड़ी शर्तें अब भी लागू हैं, जिनका पालन करना बिल्डरों के लिए अनिवार्य है.
योजना की मूल शर्तों का उल्लंघन
योजना की मूल शर्तों के अनुसार कुल भूमि का 70 प्रतिशत हिस्सा स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए विकसित किया जाना था, जबकि शेष 30 प्रतिशत में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई थी. लेकिन जांच में सामने आया कि बिल्डरों ने खेल सुविधाओं के विकास पर कोई ठोस कार्य नहीं किया.
प्राधिकरण ने इन शर्तों के साथ दी राहत
प्राधिकरण ने अब स्पष्ट कर दिया है कि अधिभोग प्रमाण पत्र उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा, जो सभी नियमों और मानकों का पालन करेंगी. इसके तहत बिल्डरों को पर्यावरण, भवन निर्माण, रियल एस्टेट और अपार्टमेंट कानूनों का पूरी तरह अनुपालन करना होगा. साथ ही, परियोजना में जल, बिजली, सीवरेज, अग्निशमन, लिफ्ट, वर्षा जल संचयन और रीसाइक्लिंग जैसी सभी सुविधाओं को सुचारु रूप से चालू रखना अनिवार्य होगा.
बगैर अनुमति हर प्रकार का निर्माण अवैध
इसके अलावा, बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण परिवर्तन अवैध माना जाएगा और उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. विजिटर पार्किंग, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य की गई हैं.
प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया है कि फ्लैट का कब्जा तभी दिया जाएगा, जब अधिभोग प्रमाण पत्र जारी हो जाएगा. साथ ही, परियोजना की सभी सेवाओं का सत्यापन दो महीने के भीतर कराना होगा.
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में सामने आई इन खामियों ने न केवल बिल्डरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हजारों निवेशकों की चिंता भी बढ़ा दी है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिल्डर तय समय में शर्तों का पालन कर पाते हैं या नहीं.
