संचार नाउ। CBSE ने छात्रों के लिए पढ़ाई को आसान, कम बोझिल और अधिक व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से तीन बड़े बदलाव लागू किए हैं। इन नए नियमों का मकसद रटने वाली पढ़ाई को खत्म कर बच्चों के स्किल्स और रुचियों को बढ़ावा देना है। CBSE का यह कदम शिक्षा को अधिक संतुलित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
सबसे पहला बदलाव कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए है। अब उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। इससे छात्रों को अपनी संस्कृति और देश की विविध भाषाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
दूसरा बड़ा बदलाव कक्षा 9 के छात्रों के लिए किया गया है। अब मैथ्स और साइंस दोनों विषयों के दो स्तर होंगे—स्टैंडर्ड और बेसिक। स्टैंडर्ड स्तर उन छात्रों के लिए होगा जो आगे चलकर इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसे क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, जबकि बेसिक स्तर उन छात्रों के लिए होगा जिन्हें ये विषय कठिन लगते हैं और वे आगे इन्हें नहीं पढ़ना चाहते।
तीसरा अहम बदलाव ‘क्रेडिट सिस्टम’ की शुरुआत है। अब केवल परीक्षा के अंक ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे, बल्कि खेल, संगीत और अन्य गतिविधियों में भाग लेने पर भी छात्रों को क्रेडिट पॉइंट्स मिलेंगे, जो उनकी मार्कशीट में जोड़े जाएंगे।
