नोएडा : उत्तर प्रदेश के नोएडा से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां 2023 की अगस्त में जिला अस्पताल में 17 स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती की गई थी, अब उन स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है. कहा जा रहा है कि शासन के आदेशों को दरकिनार रखकर इन लोगों की अवैध भर्ती की गई थी. आइए जानते हैं पूरा मामला.
ऐसे हुई भर्ती
तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने 2023 और 2025 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 15 स्टाफ नर्स एवं दो लैब टेक्नीशियन की भर्ती की थी. छह स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन को अगस्त 2023 में भर्ती किया. नौ स्टाफ नर्स को 2025 के अलग-अलग महीनों में जिला अस्पताल में रखा गया था. जब इस बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को भनक लगी तो स्वास्थ्य विभाग से कर्मियों की ज्वॉइनिंग की तारीख समेत कई जरूरी जानकारी मांगी.
सामने आया घोटाला
जानकारी सामने आने पर डाटा में गड़बडी पाई गई. पता लगा कि नियमानुसार स्थानीय स्तर पर स्टाफ की भर्ती नहीं हो सकती थी, बावजूद इन्हें आउटसोर्स एजेंसी से सांठगांठ कर भर्ती कर लिया गया. अधिकारी बताते हैं कि शासन से 2023 के शुरुआती महीने में आदेश आया था कि प्रदेश के समस्त जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती लखनऊ मुख्यालय से की जाएगी. इस आदेश के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन की भर्ती कर दी.
लाखों की सैलरी
आठ स्वास्थ्यर्मियों को लगभग 58 लाख रुपये वेतन अदा किया. नौ स्वास्थ्यकर्मियों को करीब 21 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर किए गए. सूत्र बताते हैं कि कर्मियों की भर्ती अलीगढ़ की एक एजेंसी के माध्यम से जिला अस्पताल प्रबंधन ने की थी.
स्थानीय स्तर से भर्ती घोटाला सामने आने के बाद हैरानी की बात है कि स्वास्थ्य विभाग के तमाम जिम्मेदार अधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नियमों को तोड़ने पर भी आंखें मूंदकर बैठे रहे. भर्ती में भ्रष्टाचार की बू आने का मामला लखनऊ पहुंचा था. गोपनीय जांच कराई तो सभी के होश उड़ गए. इसके बाद लखनऊ से सीएमओ के पास सभी का वेतन रोकने का पत्र जारी हुआ.
