संचार नाउ। दादरी तहसील में तैनात अधिवक्ताओं और डीड राइटरों का रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले 10 दिनों से रजिस्ट्री कार्य का बहिष्कार कर रहे सैकड़ों वकीलों ने बुधवार को दादरी की सड़कों पर मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।
दरअसल, प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया को ऑनलाइन और निजी हाथों में सौंपे जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था से वकीलों और डीड राइटरों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा और हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने बताया कि प्रदेश में करीब 5 लाख अधिवक्ता हैं, जबकि उनके आश्रितों की संख्या लगभग एक करोड़ के आसपास है। उनका कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी और आर्थिक संकट की चपेट में आ जाएंगे। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने और अधिवक्ताओं व डीड राइटरों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
वकीलों ने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल गौतम बुद्ध नगर तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सभी 75 तहसीलों में अधिवक्ता और डीड राइटर इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
