संचार नाउ। आकृति चौधरी NSA मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसमें आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने और संबंधित अधिकारियों के वेतन से इसकी वसूली का निर्देश दिया गया था।
दरअसल, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे अहम सवाल यह रहा कि जब NSA लगाने की प्रक्रिया में कई स्तरों के अधिकारी शामिल थे, तो जिलाधिकारी मेधा रूपम को अलग करके व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? अदालत की पीठ ने इसी पहलू पर मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या पूरी प्रक्रिया के लिए केवल DM पर 5 लाख रुपये की देनदारी डाली जा सकती है।
SC ने पूछा—क्या पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी सिर्फ DM की?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के सामने यह बात रखी गई कि NSA की कार्रवाई किसी एक अधिकारी के स्तर पर पूरी नहीं हुई थी। अदालत के सामने बताया गया कि पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट और अन्य प्रशासनिक स्तरों से गुजरने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल उठाया कि यदि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कई अधिकारी और संस्थाएं शामिल थीं, तो DM को इस पूरी प्रक्रिया से अलग करके केवल उन्हीं पर 5 लाख रुपये की व्यक्तिगत जिम्मेदारी कैसे डाली जा सकती है।
UP सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। दलील दी गई कि जिलाधिकारी ने पुलिस से प्राप्त रिपोर्ट और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की थी। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मामला आगे एडवाइजरी कमेटी सहित अन्य स्तरों तक गया था। सरकार की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि जब निर्णय प्रक्रिया में कई स्तर शामिल थे, तो व्यक्तिगत रूप से केवल जिलाधिकारी पर आर्थिक दायित्व डालना उचित कैसे माना जाए।
मेधा रूपम की ओर से क्या कहा गया?
मेधा रूपम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी निर्णय प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों का हवाला दिया। उनकी ओर से कहा गया कि कार्रवाई पुलिस स्तर से शुरू होकर प्रशासनिक और सलाहकारी स्तरों से आगे बढ़ी थी। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 5 लाख रुपये का मुआवजा संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया गया था।
आकृति चौधरी की ओर से याचिका का विरोध
दूसरी ओर, आकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने मेधा रूपम की याचिका का विरोध किया। उनकी ओर से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाने की मांग की गई और प्रशासन के पास पर्याप्त सामग्री नहीं होने का तर्क रखा गया।
क्या है आकृति चौधरी NSA मामला?
यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की गिरफ्तारी और बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई कार्रवाई से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को उनकी NSA हिरासत को रद्द करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ही मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से अंतिम फैसला सुनाया जाना बाकी है। इसलिए 5 लाख रुपये की वसूली के संबंध में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
Sanchar Now | एहसास बदलाव का…
